जनरल रावत के बयान पर पाक ने तरेरी आंख

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-कहा: हमारे जवान भी जवाब देने के लिए मुकम्मल तौर पर तैयार

मोदी सरकार ने लगाया हज सब्सिडी पर ताला

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- हर साल हज यात्रा पर सब्सिडी के रूप में खर्च हो जाते थे 700 करोड़ रुपए - ओवैसी ने पूछा-क्या...

भगवान राम और राहुल गांधी एक जैसे: त्यागी

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  -2019 में देष में ’राहुल राज’ के जरिए रामराज आने का कांग्रेसियों का दावा -अध्यक्ष बनने के...

दिल्ली के वकीलों ने सुप्रीमकोर्ट के जज विवाद को कहा ’काला दिन’

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-दस दिनों में समस्या हल न की गयी तो लोगों के बीच जाने का भी अल्टीमेटम -न्यायापालिका के विवादों...

सुप्रीमकोर्ट ने योगी सरकार को लताड़ा

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-कहा: मशीनरी फेल हो गई, आपसे नहीं हो पाएगा फोटो केवल सिम्बॉलिक है। 

भाजपा और संघ के भीतर भी आतंकी: सिद्धारमैया

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- कर्नाटक के सीएम ने कहा- बर्दाश्त नहीं करूंगा सूबे में फिरकावाराना हरकत वालों को बंगलुरू।...

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 यूपी में लाउडस्पीकर पर अब न जय  सियाराम न अल्लाहु अकबर

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-सूबे के मंदिर-मस्जिद अथवा गिरजा-गुरुद्वारे में बिना इजाजत नहीं बजंेगे ध्वनिविस्तारक यंत्र

लालू को सजा, बिहार में बमबम

-जेपी की तर्ज पर सूबे में एलपी आंदोलन लगभग तय  -तेजस्वी ने कहा-लालू, नीतीश नहीं, जो कुर्सी के लिए...

 ’.......तो हिन्दुओं के घर पैदा होंगे हाफिज सईद’

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भोपाल में आयोजित लाठी रैली में मंच पर एक-दूसरे का हाथ थामे पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव, पूर्व...

भारतीय षेरों ने फिर मारे 10 पाकिस्तानी गीदड़

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-चौबीस घंटे से भी कम समय में लिया अपने भाइयों की शहादत का इंतकाम

आंध्र के युवक ने ऐष्वर्य को बताया अपनी आईवीएफ मां 

  -दावा किया कि आईवीएपफ तकनीक से ऐष्वर्य ने उसे दिया 1988 में जन्म मुंबई। आंध्र प्रदेश के 29...

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मन न रंगाये, रंगाये जोगी कपड़ा .............?

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कल रेलयात्रा पर था। बाहर फर्राटा भरते इंजन का रोंगटे खड़े कर देने वाला षोर तो भीतर कुछ लोगों के...

  •  जनरल रावत के बयान पर पाक ने तरेरी आंख

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    Friday, 19 January 2018 02:45
  • मोदी सरकार ने लगाया हज सब्सिडी पर ताला

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    Wednesday, 17 January 2018 02:05
  • भगवान राम और राहुल गांधी एक जैसे: त्यागी

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    Tuesday, 16 January 2018 02:37
  • दिल्ली के वकीलों ने सुप्रीमकोर्ट के जज विवाद को कहा ’काला दिन’

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    Monday, 15 January 2018 00:24
  • सुप्रीमकोर्ट ने योगी सरकार को लताड़ा

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    Friday, 12 January 2018 00:47
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    Thursday, 11 January 2018 00:28
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    Thursday, 11 January 2018 00:27
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    Monday, 08 January 2018 00:21
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    Sunday, 07 January 2018 02:34
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    Saturday, 06 January 2018 01:54
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    Friday, 05 January 2018 01:13
  • आंध्र के युवक ने ऐष्वर्य को बताया अपनी आईवीएफ मां 

    Thursday, 04 January 2018 01:02
  • आंध्र के युवक ने ऐष्वर्य को बताया अपनी आईवीएफ मां 

    Thursday, 04 January 2018 01:02
  • आंध्र के युवक ने ऐष्वर्य को बताया अपनी आईवीएफ मां 

    Thursday, 04 January 2018 01:02
  • मन न रंगाये, रंगाये जोगी कपड़ा .............?

    मन न रंगाये, रंगाये जोगी कपड़ा .............?

    Wednesday, 03 January 2018 02:00

राज रंजना

पुलिस प्लेटफार्म

विविध रंग

आंध्र के युवक ने ऐष्वर्य को बताया अपनी आईवीएफ मां 

  -दावा किया कि आईवीएपफ तकनीक से ऐष्वर्य ने उसे दिया 1988 में जन्म मुंबई। आंध्र प्रदेश के 29 वर्शीय एक युवक संगीत कुमार ने यह दावा करके सनसनी फैला दी है कि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की पुत्रवधू ऐश्वर्य रॉय बच्चन उनकी मां हैं। उसके इस दावे से बच्चन परिवार सकते में है। हालांकि उसने इस बावत कोई प्रतिक्रिया फिलहाल नहीं दी है। वैसे अतीत के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि ऐष्वर्य ने 2007 में अभिषेक बच्चन के साथ सात फेरे लिये थे। आज की तिथि में उन्हें 6 साल की एक बेटी आराध्या है जिसे बिग बी बेहद प्यार करते हैं।  उधर संगीत कुमार का दावा है कि ऐष्वर्य ने सेलिब्रिटी बनने से पहले आईवीएफ टेक्नीक से 1988 में उसे लंदन में जन्म दिया था। उसने बताया कि 3 से 27 साल तक वह चोड़ावरम में रहा। शुरुआती दो साल तक नानी वृंदा कृष्णराज रॉय के परिवार के साथ रहा। पिछले साल उसके नाना ने यह दुनिया छोड़ दी। उसके उसके मामा का नाम आदित्य रॉय है। संगीत का दावा तो यहां तक है कि उसकी मां ने साल 2007 में अभिषेक बच्चन से शादी की थी। अब वह उनसे अलग हो चुकी हैं और आजकल अकेले ही रह रही हैं। उसका कहना है कि अब वह चाहता है कि वह मंगलुरु आकर उसके साथ रहने लगें।  उसने यह भी कहा कि वह 27 साल से अपने परिवार  से दूर है और उन्हें बहुत मिस करता है। उसने कहाएष्ष्मैं चाहता हूं कि मुझे मां का नंबर जल्द से जल्द मिल जाए।ष्ष् संगीत यह भी कहता है कि सही जानकारी नहीं मिल पाने की वजह से वह ऐश्वर्या तक नहीं पहुंच पा रहा था अन्यथा कब का उनके पास पहुंच जाता। अगर संगीत की बात पर यकीन करना या न करना दरकिनार लेकिन हकीकत यह है कि 1988 में ऐश्वर्या की उम्र महज 14 साल ही थी। अब यह एक बेहद तकनीकी सवाल होगा कि क्या ऐष्वर्या महज 14 साल की उम्र में मां बनने के लिए परिपक्व थीं!   

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कल रेलयात्रा पर था। बाहर फर्राटा भरते इंजन का रोंगटे खड़े कर देने वाला षोर तो भीतर कुछ लोगों के बीच सियासी चखचख। वही बहस, जो अक्सर रेलगाड़ियों में बेकोषिष षुरू हो जाती रही है। एक ने कहा-’’लो भइया, यूपी में स्थानीय निकाय के बाद हिमाचल और गुजरात में भी केसरिया ब्रिगेड की फतह! जीतता भी कैसे न ? काम जो लाजवाब किया है। अरे मैं तो कहता हूं अभी इस मुल्क में दषकों कायम रहेगा मोदी जादू ़  ़ ़ ़ ़ ।’’ पता नहीं यह महज इत्तेफाक था या किसी ने इस बहस को ज्यादा गुलाबी बनाने की गरज से किया लेकिन कोई मोबाइल फोन अकस्मात उगलने लगा,’’मैंने रंग ली आज चुनरिया, सजना तोरे रंग में ़ ़ ़ ़ ़।’’ 

इसी बीच एक कोने से एक दूसरे सज्जन ने वार किया,’’धन्यवाद भइया, आपने तो जोगी जी की असली कैफियत, फितरत और मकबूलियत तीनों को लता जी का स्वर दे दिया। ये भइया! अब एक ठो कबीरदास जी का भजन लोड कर देना-’मन न रंगाये, रंगाये जोगी कपड़ा ़ ़ ़ ़ ़ ़।’’ कुछ ठहाके लगे और बहस फिर चालू।

बहस का विशय थे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ’केसरिया’ के प्रति उनकी बेमिसाल खुदसुपुर्दगी। एक ने बताया-’अरे भइया अब तो योगी जी ने केसरिया लहर ही बहा दी है। एक नया ’भगवालोक’ ही बसाने की कसम खा ली है और वह भी करदाताओं की दौलत से।’ कौतूहलवष किसी ने पूछ लिया,’क्यों भइया वह कैसे।’जवाब मिला-’ जो नौकरषाह इस बात का थाह लगा बैठे हैं कि केसरिया रंग ’बाबा’

को खुष करने का एक मजबूत जरिया है, वे यूपी को ’भगवालोक’ बनाने के लिए ’जहाज से बाहर’ आ चुके हैं। इसकी षुरुआत सचिवालय से हुई और उसकी दर-ओ-दीवार पर केसरिया पेण्ट की पर्त चढ़वा दी गयी। इसके बाद तो साहब, यह रंग रोडवेज की बसों पर सवार होकर बिजली के खम्भों तक जा पहुंचा है। सरकारी स्कूलों के बच्चों को बांटे गये स्कूलबैग तक पर लहराने लगा है। सरकारी डायरेक्टरी का कवर भी इसी रंग में डूब गया है। मुख्यमंत्री सचिवालय के तौलिये, सोफे और पर्दे पर भी इसी रंग का सुरूर चढ़ गया है। आलम यह है कि अब तो योगी जी जिन कार्यक्रमों में जलवागर होते हैं उनके टेण्ट और तम्बू कनात तक तक केसरिया रंग में सराबोर होते हैं। यहां तक कि उनके लिए बनने वाले मंच पर अब गुलाब यदा-कदा लेकिन गेंदा का फूल सिर चढ़कर इतराता नजर आता है। बाकी तो दरकिनार अब विधानसभा की घड़ी भी केसरिया जलवा बिखेर रही है।’

 ब्योरा पेष करने वाले ने एक लम्बी सांस ली और फिर षुरू हो गया,’’ सज्जनों बात यहीं खत्म नहीं होती है। इस समय तो सरकारी स्कूल और अस्पताल और पार्कों में लोगों के बैठने की लिए बनी बेंचेज पर भी केसरिया रंग चढ़ाया जा रहा है। कानपुर में श्रीलंका के साथ मैच खेलने आयी भारतीय क्रिकेट टीम का स्वागत भी आरेंज कलर के गमछे हवा में लहराकर किया गया। इतना ही नहीं पिछले दिनों लखनउ में आईएएस एकादष के साथ मैत्री मैच खेलने आयी आईपीएस टीम के सदस्यों को मैदान पर केसरिया रंग की टी-षर्ट पहनाई गयी। और सुनिये, विधान भवन कैण्टीन के वेटरों को भी केसरिया आजकल केसरिया रंग की षर्ट में लिपटे देखा जा रहा है। और अबतो हालात ये हैं कि पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्टी के सदस्य तक कहने लगे हैं कि षायद यह पहला अवसर है जब एक खास रंग ने उद्योग का रूप ले लिया है।

 एक अन्य यात्री ने जोड़ा....... अरे भाई साहब! एक प्रमुख पेण्ट डीलर का कहना है कि इससे पहले कभी भी केसरिया पेण्ट की मांग इतनी जबरदस्त नहीं थी जितना आज हो गयी है। यह मांग तभी से बढ़ी है जबसे योगी पावर में आये हैं। आजकल पार्टी अथवा सरकार के किसी कार्यक्रम में षिरकत करने वाले ज्यादातर मंत्री और खुद मुख्यमंत्री केसरिया वेषभूशा में ही नजर आते हैं। एक दुकानदार का कहना है कि योगी सरकार बनने के तुरंत बाद जब केसरिया पेण्ट की मांग बढ़ी तो हम लोगों ने सही अनुपात में पीले और लाल रंग को मिलाकर केसरिया रंग बना लिया था लेकिन अबतो

रेडीमेड सेफ्रान पेण्ट आने लगा है जिसे लकड़ी अथवा लोहे पर आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।

केसरिया का जलवा किस हद तक बुलंद है, इसका अन्दाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सूबे की विधानसभा में भाजपा सदस्यों की ट्ेजरी बेंचों को भी केसरिया रंग में डुबो दिया गया है। पुरुश भाजपा विधायक तो सदन में केसरिया कुर्ता, इसी रंग का जैकेट और इसी रंग की पगड़ी पहनकर आते हैं जबकि महिला विधायक केसरिया साड़ी तथा इसी रंग की षॉल में आती हैं। दारुलषफा परिसर में खादी बेचने वाले एक दुकानदार का कहना है कि अब परम्परागत सफेद कपड़े की बिक्री बहुत कम हो गयी है। लोग ज्यादातर केसरिया कपड़े मांगते हैं लेकिन चूंकि केसरिया खादी उपलब्ध नही है, इसलिए वे सफेद कपड़े को ही केसरिया में रंगवाकर बेच रहे हैं। केसरिया की इस बेपनाह डिमाण्ड को देखते हुए एक ऑनलाइन षॉपिंग पोर्टल ने तो केसरिया स्निकर्स यानि एक प्रकार के जूते तक बेचने षुरू कर दिये हैं जिन्हें विधानमण्डल के षीतकालीन सत्र में लगभग एक दर्जन विधायक पहने हुए देखे गये।’’

बहस में एक अन्य भी षामिल हो गया। बोला-’’अरे हमसे सुनिये जनाब केसरिया का इकबाल इस हद तक बुलन्द हो गया है कि अब नौकरषाही ने भी खुद को इसी रंग में रंगना षुरू कर दिया है। बताते हैं कि हाल के दिनों में मुख्यमंत्री योगी की पीलीभीत यात्रा के दौरान वहां की जिला कलेक्टर षीतल वर्मा तो ऑफीषियल डेस कोड को किनारे रख खुद इसी रंग की साड़ी में लिपटी देखी गयीं। उधर भाजपा नेता और राज्य सरकार के कुछ मंत्री इस बारे में दलीलें देते हुए इसे जायज ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि केसरिया रंग तो क्रांति का प्रतीक है। वह रचनात्मकता, सकारात्मकता और सापेक्षता का द्योतक है। वे यह भी दलील देते हैं कि आखिर सूर्यदेव और अग्निदेव का रंग भी तो केसरिया ही है जो जगत के षाष्वत सत्य हैं। अरे वाह भाई क्या खूब तर्क है। ऐसा तो सपा-बसपा ने भी कभी नहीं किया। मायावती ने नीला रंग चुना लेकिन उसे घर और दफृतर के भीतर कभी नहीं आने दिया। इने में टेन का ब्रेक लगा और बहस करने वाले अधिकांष सदस्य बुदबुदाते हुए बोगी से बाहर हो गये। प्लेटफार्म तक बुदबुदाते जा रहे थे-मन न रंगाये, रंगाये जोगी कपड़ा .............?

कल रेलयात्रा पर था। बाहर फर्राटा भरते इंजन का रोंगटे खड़े कर देने वाला षोर तो भीतर कुछ लोगों के बीच सियासी चखचख। वही बहस, जो अक्सर रेलगाड़ियों में बेकोषिष षुरू हो जाती रही है। एक ने कहा-’’लो भइया, यूपी में स्थानीय निकाय के बाद हिमाचल और गुजरात में भी केसरिया ब्रिगेड की फतह! जीतता भी कैसे न ? काम जो लाजवाब किया है। अरे मैं तो कहता हूं अभी इस मुल्क में दषकों कायम रहेगा मोदी जादू....... ।’’ पता नहीं यह महज इत्तेफाक था या किसी ने इस बहस को ज्यादा गुलाबी बनाने की गरज से किया लेकिन कोई मोबाइल फोन अकस्मात उगलने लगा,’’मैंने रंग ली आज चुनरिया, सजना तोरे रंग में.......।’’ 

इसी बीच एक कोने से एक दूसरे सज्जन ने वार किया,’’धन्यवाद भइया, आपने तो जोगी जी की असली कैफियत, फितरत और मकबूलियत तीनों को लता जी का स्वर दे दिया। ये भइया! अब एक ठो कबीरदास जी का भजन लोड कर देना-’मन न रंगाये, रंगाये जोगी कपड़ा.......।’’ कुछ ठहाके लगे और बहस फिर चालू।

बहस का विशय थे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ’केसरिया’ के प्रति उनकी बेमिसाल खुदसुपुर्दगी। एक ने बताया-’अरे भइया अब तो योगी जी ने केसरिया लहर ही बहा दी है। एक नया ’भगवालोक’ ही बसाने की कसम खा ली है और वह भी करदाताओं की दौलत से।’ कौतूहलवष किसी ने पूछ लिया,’क्यों भइया वह कैसे।’जवाब मिला-’ जो नौकरषाह इस बात का थाह लगा बैठे हैं कि केसरिया रंग ’बाबा’

को खुष करने का एक मजबूत जरिया है, वे यूपी को ’भगवालोक’ बनाने के लिए ’जहाज से बाहर’ आ चुके हैं। इसकी षुरुआत सचिवालय से हुई और उसकी दर-ओ-दीवार पर केसरिया पेण्ट की पर्त चढ़वा दी गयी। इसके बाद तो साहब, यह रंग रोडवेज की बसों पर सवार होकर बिजली के खम्भों तक जा पहुंचा है। सरकारी स्कूलों के बच्चों को बांटे गये स्कूलबैग तक पर लहराने लगा है। सरकारी डायरेक्टरी का कवर भी इसी रंग में डूब गया है। मुख्यमंत्री सचिवालय के तौलिये, सोफे और पर्दे पर भी इसी रंग का सुरूर चढ़ गया है। आलम यह है कि अब तो योगी जी जिन कार्यक्रमों में जलवागर होते हैं उनके टेण्ट और तम्बू कनात तक तक केसरिया रंग में सराबोर होते हैं। यहां तक कि उनके लिए बनने वाले मंच पर अब गुलाब यदा-कदा लेकिन गेंदा का फूल सिर चढ़कर इतराता नजर आता है। बाकी तो दरकिनार अब विधानसभा की घड़ी भी केसरिया जलवा बिखेर रही है।’

 ब्योरा पेष करने वाले ने एक लम्बी सांस ली और फिर षुरू हो गया,’’ सज्जनों बात यहीं खत्म नहीं होती है। इस समय तो सरकारी स्कूल और अस्पताल और पार्कों में लोगों के बैठने की लिए बनी बेंचेज पर भी केसरिया रंग चढ़ाया जा रहा है। कानपुर में श्रीलंका के साथ मैच खेलने आयी भारतीय क्रिकेट टीम का स्वागत भी आरेंज कलर के गमछे हवा में लहराकर किया गया। इतना ही नहीं पिछले दिनों लखनउ में आईएएस एकादष के साथ मैत्री मैच खेलने आयी आईपीएस टीम के सदस्यों को मैदान पर केसरिया रंग की टी-षर्ट पहनाई गयी। और सुनिये, विधान भवन कैण्टीन के वेटरों को भी केसरिया आजकल केसरिया रंग की षर्ट में लिपटे देखा जा रहा है। और अबतो हालात ये हैं कि पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्टी के सदस्य तक कहने लगे हैं कि षायद यह पहला अवसर है जब एक खास रंग ने उद्योग का रूप ले लिया है।

 एक अन्य यात्री ने जोड़ा....... अरे भाई साहब! एक प्रमुख पेण्ट डीलर का कहना है कि इससे पहले कभी भी केसरिया पेण्ट की मांग इतनी जबरदस्त नहीं थी जितना आज हो गयी है। यह मांग तभी से बढ़ी है जबसे योगी पावर में आये हैं। आजकल पार्टी अथवा सरकार के किसी कार्यक्रम में षिरकत करने वाले ज्यादातर मंत्री और खुद मुख्यमंत्री केसरिया वेषभूशा में ही नजर आते हैं। एक दुकानदार का कहना है कि योगी सरकार बनने के तुरंत बाद जब केसरिया पेण्ट की मांग बढ़ी तो हम लोगों ने सही अनुपात में पीले और लाल रंग को मिलाकर केसरिया रंग बना लिया था लेकिन अबतो रेडीमेड सेफ्रान पेण्ट आने लगा है जिसे लकड़ी अथवा लोहे पर आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।

केसरिया का जलवा किस हद तक बुलंद है, इसका अन्दाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सूबे की विधानसभा में भाजपा सदस्यों की ट्ेजरी बेंचों को भी केसरिया रंग में डुबो दिया गया है। पुरुश भाजपा विधायक तो सदन में केसरिया कुर्ता, इसी रंग का जैकेट और इसी रंग की पगड़ी पहनकर आते हैं जबकि महिला विधायक केसरिया साड़ी तथा इसी रंग की षॉल में आती हैं। दारुलषफा परिसर में खादी बेचने वाले एक दुकानदार का कहना है कि अब परम्परागत सफेद कपड़े की बिक्री बहुत कम हो गयी है। लोग ज्यादातर केसरिया कपड़े मांगते हैं लेकिन चूंकि केसरिया खादी उपलब्ध नही है, इसलिए वे सफेद कपड़े को ही केसरिया में रंगवाकर बेच रहे हैं। केसरिया की इस बेपनाह डिमाण्ड को देखते हुए एक ऑनलाइन षॉपिंग पोर्टल ने तो केसरिया स्निकर्स यानि एक प्रकार के जूते तक बेचने षुरू कर दिये हैं जिन्हें विधानमण्डल के षीतकालीन सत्र में लगभग एक दर्जन विधायक पहने हुए देखे गये।’’

बहस में एक अन्य भी षामिल हो गया। बोला-’’अरे हमसे सुनिये जनाब केसरिया का इकबाल इस हद तक बुलन्द हो गया है कि अब नौकरषाही ने भी खुद को इसी रंग में रंगना षुरू कर दिया है। बताते हैं कि हाल के दिनों में मुख्यमंत्री योगी की पीलीभीत यात्रा के दौरान वहां की जिला कलेक्टर षीतल वर्मा तो ऑफीषियल डेस कोड को किनारे रख खुद इसी रंग की साड़ी में लिपटी देखी गयीं। उधर भाजपा नेता और राज्य सरकार के कुछ मंत्री इस बारे में दलीलें देते हुए इसे जायज ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि केसरिया रंग तो क्रांति का प्रतीक है। वह रचनात्मकता, सकारात्मकता और सापेक्षता का द्योतक है। वे यह भी दलील देते हैं कि आखिर सूर्यदेव और अग्निदेव का रंग भी तो केसरिया ही है जो जगत के षाष्वत सत्य हैं। अरे वाह भाई क्या खूब तर्क है। ऐसा तो सपा-बसपा ने भी कभी नहीं किया। मायावती ने नीला रंग चुना लेकिन उसे घर और दफृतर के भीतर कभी नहीं आने दिया। इने में टेन का ब्रेक लगा और बहस करने वाले अधिकांष सदस्य बुदबुदाते हुए बोगी से बाहर हो गये। प्लेटफार्म तक बुदबुदाते जा रहे थे-ये रंग ही एक दिन भगवा ब्रिगेड को बदरंग करके छोड़ेगा। देखते जाइये। एक ने जोर से टेर लगायी-’मन न रंगाये रंगाये जोगी कपड़ा।’ ये रंग ही एक दिन भगवा ब्रिगेड को बदरंग करके छोड़ेगा। देखते जाइये। एक ने जोर से टेर लगायी-’मन न रंगाये रंगाये जोगी कपड़ा।’

 

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