सुनंदा केसः थरूर से फिर होगी पूछताछ, जानें अमर सिंह से पूछे गए कौन से सवाल

सुनंदा केसः थरूर से फिर होगी पूछताछ, जानें अमर सिंह से पूछे गए कौन से सवाल

नई दिल्ली. पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की हत्या के...

केजरीवाल बोले- किरण को हराने के लिए गोयल, उपाध्याय, हर्षवर्धन रच रहे साजिश

केजरीवाल बोले- किरण को हराने के लिए गोयल, उपाध्याय, हर्षवर्धन रच रहे साजिश

नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार कर रहे आप आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने...

जापानी बंधक के बदले रिहा की जाएगी आतंकी साजिदा मुबारक

जापानी बंधक के बदले रिहा की जाएगी आतंकी साजिदा मुबारक

अम्मान। जॉर्डन की जेल में बंद इराकी आतंकी साजिदा मुबारक अतरौस अल-रिशावी को रिहा किया जाएगा। ताजा...

पाकिस्तान ने फिर की सीमा पर 12 घंटे गोलीबारी

पाकिस्तान ने फिर की सीमा पर 12 घंटे गोलीबारी

श्रीनगर। पाकिस्तानी फौज ने जम्मू-कश्मीर में अपनी हरकतें जारी रखते हुए शुक्रवार को भी संघर्षविराम...

  • सुनंदा केसः थरूर से फिर होगी पूछताछ, जानें अमर सिंह से पूछे गए कौन से सवाल

    सुनंदा केसः थरूर से फिर होगी पूछताछ, जानें अमर सिंह से पूछे गए कौन से सवाल

    Wednesday, 28 January 2015 15:06
  • केजरीवाल बोले- किरण को हराने के लिए गोयल, उपाध्याय, हर्षवर्धन रच रहे साजिश

    केजरीवाल बोले- किरण को हराने के लिए गोयल, उपाध्याय, हर्षवर्धन रच रहे साजिश

    Wednesday, 28 January 2015 15:09
  • जापानी बंधक के बदले रिहा की जाएगी आतंकी साजिदा मुबारक

    जापानी बंधक के बदले रिहा की जाएगी आतंकी साजिदा मुबारक

    Wednesday, 28 January 2015 15:22
  • पाकिस्तान ने फिर की सीमा पर 12 घंटे गोलीबारी

    पाकिस्तान ने फिर की सीमा पर 12 घंटे गोलीबारी

    Friday, 07 August 2015 18:09
  • श्रीनगर में लहराए लश्कर व पाक के झंडे, पोस्टर

    श्रीनगर में लहराए लश्कर व पाक के झंडे, पोस्टर

    Friday, 21 August 2015 16:45

राज रंजना

पुलिस प्लेटफार्म

लखनऊ पुलिस का नया कारनामा, मृतक को बना दिया कच्चा शराब बनाने का आरोपी

लखनऊ. मलीहाबाद शराब त्रासदी के बाद हरक में आई पुलिस का नया कारनामा सामने आया है। पारा में कच्ची शराब बनाने के आरोप में पुलिस ने तीन साल पहले मृतक को आरोपी बनाकर सरगर्मी से तलाश कर रही है। पुलिस का आरोप है कि मृतक जहरीली शराब बनाने के काम में लगा हुआ है।  मिली जानकारी के अनुसार, पारा थानांतर्गत आने वाले सरौसा सदर निवासी राजू पुत्र जगनू की तीन साल पहले मौत हो गई है। पारा पुलिस राजू के नाम पर भी मुकदमा दर्ज कर लिया और उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है। परिजनों की माने तो उसकी खोज बीन में कई बार पारा पुलिस दरवाजे तक आ चुकी है और उसे हाजिर करने का दबाव बना रही है। रिकॉर्ड में था शराब कारोबारी   पुलिस के रिकॉर्ड में वह कच्ची शराब का कारोबारी था।

विविध रंग

इनवेस्टर्स मीट: नोएडा में लगेगा सैमसंग प्लांट, पांच हजार करोड़ के एमओयू साइन

लखनऊ. मोबाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए यूपी सरकार ने एक नई पहल की है। इसके तहत मंगलवार को ई-उत्तर प्रदेश इनवेस्टर्स मीट का आयोजन किया गया। इसमें देशभर से आए उद्यमियों का जमावड़ा लगा। सीएम अखिलेश यादव ने इनवेस्टर्स मीट की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन, लावा स्पाइस और इओएन के साथ कई अहम योजनाओं को लेकर करीब पांच हजार करोड़ रुपए के मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर साइन किए। इससे कुल 50 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। मीट में इसके अलावा नोएडा में सैमसंग मोबाइल प्लांट और गाजियाबाद में आईटी पार्क बनाने पर भी फैसला लिया गया। इन्वेस्टर्स मीट में इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ इंडिया के जनरल सेक्रेटरी राजू गोयल, इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमी कंडक्टर के चेयरमैन अशोक चंडक, इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन के नेशनल प्रेसिडेंट पंकज मोहिंदू, स्पाइस ग्रुप के दिलीप मोदी, एम्बेसी ऑफ रिपब्लिक कोरिया

विज्ञापन

आरएसएस सोलंकी 

’ई देखा कलजुग के सरिहन निशानी, कहां गंगाजल अऊर कहां गंगा पानी।’ आजकल गंगा कुछ ऐसी ही स्थिति में हैं। ईमानदारी से बोला जाय तो काषी में गंगा मइया, ’गीता है, धरम, वेद है, पुरान है गंगा! मर्यादा है इस देश की पहचान है गंगा!! जैसी पंक्तियों के निहितार्थ में कहीं भी नहीं दिखाई देतीं हैं। गंगा मइया की इस परिभाषा के पीछे एक अदृश्य आग्रह था और वह था गंगा को निर्मल और अविरल बनाये रखने का लेकिन पिछले कुछ वर्षों से लगने लगा है कि गंगा का गंगत्व अब निर्मलता का मोहताज हो गया है। खुद केन्द्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में स्वीकार किया है कि महातीर्थ प्रयाग तथा देष की धार्मिक-सांस्कृतिक राजधानी काषी में गंगाजल आचमन और स्नान के लायक भी नहीं रह गया है। कहना न होगा कि कोई भी पानी स्नान के लिए तब फिट नहीं रह जाता जब उसमें बॉयलॉजिकल ऑक्सीजन डिमाण्ड (डीओबी) 3 मिलीग्राम प्रतिलीटर हो जाती है। केन्द्र सरकार की स्वीकोरोक्ति के मुताबिक गोमुख से गंगासागर के बीच गंगा इलाहाबाद में सबसे अधिक पलूटेड हैं जहां डीओबी का एक स्तर वर्तमान समय में 6,4 मिलीग्राम प्रतिलीटर रिकार्ड किया गया है। इसी प्रकार वाराणसी में बीओडी 3,4,कानपुर में 4,5 और कन्नौज में 3,9 मिलीग्राम प्रतिलीटर है। जाहिर है कि इन सभी स्थानों पर गंगाजल लगातार जहर बनता जा रहा है। गंगा मइया पिफर भी मौन होकर अपना दानी संस्कार बनाये हुए हैं। गुण्डे, पण्डे और सन्यासी सब तरते थे, आज भी तर रहे हैं।

कल्लू डोम और झींगुर माझी से लेकर गंगोत्री से गंगा सागर तक के लाखों साधु-संत तक गंगा की गंदगी पर उदास हैं। यह स्थिति तब है जब शंकराचार्यों से लेकर मठों तक के लगभग दो हजार प्रमुख साधु-संत गंगा निर्मलीकरण अभियान से जुड़ चुके हैं और रोज ही स्वच्छ गंगा की दुहाई दे रहे हैं। भगीरथ के साठ हजार पुरखों को तारने वाली पापनाशिनी को आज खुद ही तारणहारों की जरूरत पड़ गयी है। गंगा का जो स्वरूप सामने है उसे देखकर नहीं लगता कि वह पृथ्वी पर अब बहुत दिनों की मेहमान रह सकेंगी। हमारे जेहन में आज भी वर्ष 1985 के उस दिन के मंजर पूरी तरह हरे-भरे हैं जब काषी के राजेन्द्र प्रसाद घाट पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने गंगा ऐक्शन प्लान का उद्घाटन करते हुए इसके निर्मलीकरण का संकल्प लिया था। उसी समय गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करते हुए उत्तर प्रदेश बिहार और पश्चिम बंगाल को निर्मलीकरण अभियान में शामिल किया गया था। योजना का पहला चरण दस हजार करोड़ का था लेकिन इतना धन वैसे ही बह गया जैसे गंगा मइया का पानी। बनारस में जितने नाले गंगा में अपना गंदा जल डालते थे कमोबेष आज भी उतने ही अहर्निष गंगा में बह रहे हैं। सीवेज  ट्रीटमेंट प्लांट बने लेकिन केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन के समय में इसके लिए 25 हजार करोड़ रुपये की सफाई योजना बनी लेकिन उनके इस्तीफे के कारण यह परवान नहीं चढ़ सकी। एकबार फिर शुभ लक्षण मिले हैं जब नये वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने काशी से कोलकाता तक नया गंगा रूट बनाने के साथ ही गंगा के निर्मलीकरण का एक नया ढांचा बनवाना शुरू किया है। 

दरअसल गंगा की गंदगी का अवसाद 1970 के आसपास से ही सामने आने लगा था। उसके बाद के दिनों में गंगा पर किये गये सर्वेक्षणों से यह बात साफ हुई कि वर्तमान में इस नदी में नित्य 2538 मिलियन लीटर मलमूत्र और औद्योगिक कचरा प्रतिदिन गंगा गिराया जा रहा है। इसमें प्रतिवर्ष 90 फीसदी की आष्चर्यजनक वृद्धि आंकी गयी है। वैसे 1985 में केन्द्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट को दिये गये अपने एक षपथप़त्र में कहा गया था कि गंगा में यूपी बिहार और पष्चिम बंगाल के 25 षहरों का 1350 मिलियन लीटर मलजल गंगा में बह रहा है। बनारस में नालों के जरिए गंगा में गिर रहे मलजल की मात्रा 250 से बढ़कर अब 350 एमएलडी हो चुकी है। इसी प्रकार वरुणा नदी में गिर रहे अवजल की मात्रा 60 से बढ़कर 90 एमएलडी तक जा पहुंची है।

कानपुर के 372 पंजीकृत और 300 से ज्यादा गैरपंजीकृत चमड़ा कारखानों ने गंगाजल को कई-कई किलोमीटर तक काला और जहरीला कर डाला है। अकेले कानपुर में 23 ऐसे नाले हैं जिनके जरिए भारी-भरकम कू़ड़ा-कचरा नदी में गिर रहा है। इन्हें बंद करने के सारे दावे अबतक तार-तार रहे हैं। शुरू में गंगा की सफाई के लिए जो धनराशि खर्च होनी थी उसमें से 70 प्रतिशत अंशदान केन्द्र को करना था जबकि 30 प्रतिशत राज्य सरकार को। धीरे-धीरे इस कार्य में शिथिलता आती गयी और काम ज्यों का त्यों रह गया। 

आईआईटी कानपुर के एक सर्वेक्षण के मुताबिक चमड़ा कारखानों के गंदे पानी में क्रोमियम की मात्रा लगभग 124 मिलीग्राम प्रतिलीटर है जो निर्धारित मात्रा के मुकाबले 62 गुना ज्यादा है। यह भी पता चला है कि इन कारखानों में अब से डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय पहले बनी जलशोधन इकाइयों सीवेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स की टेक्नोलॉजी क्रोमियम को साफ करने में सक्षम नहीं है। पिछली सरकार इसी नदी के किनारे गंगा एक्सप्रेस-वे बनाने का मसौदा लेकर उतरी थी। उसका भी सारा मलबा सीधे नदी में जाने जाने को था। 

बताना समीचीन होगा कि गंगा एक ऐसी नदी है जो 861404 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र से होकर बहती है। इसकी राह में हजारों गांवों के अलावा प्रथम श्रेणी के 29 तथा द्वितीय के 23 शहरों के साथ ही 48 कस्बे भी आते हैं। इनकी कुल आबादी 45 करोड़ से भी ज्यादा आंकी गयी है। ये ऐसे लोग हैं जो अपनी रोजी-रोटी के लिए कमोबेश गंगा पर ही निर्भर है। इनमें पंडों, डोमों और मल्लाहों से लेकर माला-फूल आदि बेचने वाले भी शामिल हेें। जाहिर है कि जिस तेजी के साथ यह नदी दुबराती जा रही है उससे इतने लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराता जा रहा है। हालांकि गंगा को मैली करने में इनका भी काफी बड़ा हाथ रहा है।

ं.....इंसेट बॉक्स....

बनारस में क्या हुआ, क्या नहींगंगाजल शोधन के मद्देनजर बड़ी ठसक के साथ 102 एमएलडी जलशोधन के लिए दीनापुर में 80, भगवानपुर में 10 और डीरेका में 12 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पहले ही चरण में स्थापित किये गये थे। गंगा ऐक्शन प्लान के पहले चरण के इस काम को 1992 में पूरा हो जाना था लेकिन पूरा हो सका 1995 में। 95 में ही रमना गांव में ट्रीटमेंट प्लांट और नगवां नाले के निकट पंंिपग स्टेशन का निर्माण कर नाले के 35 एमएलडी पानी को शोधित करने के लिए 37 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया जिसका निर्माण अबतक नहीं हो सका है। इसी का परिणाम है कि नगवां नाले का डिस्चार्ज 35 से बढ़कर 60 एमएलडी हो गया और पूरा पानी बेरोक-टोंक गंगा में गिर रहा है। इधर नगर की मलजल निकासी बढ़कर जब 250 एमएलडी हुई तो वर्ष 2003 में ही सथवां में 120 और 140 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट बैठाकर वरुणा एवं गंगा में गिर रहे मलजल को शुद्ध करने की योजना बनी। इसे 2010 में हरी झंडी मिली लेकिन धन आवंटन और भूमि अधिग्रहण के आसरे ये दोनों प्रोजेक्ट आज भी अधर में हैं। नदियों का पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है जो जनजीवन के लिए बड़े खतरे का संकेत है। अत्यधिक जल दोहन और मलजल की मात्र बढ़ने से नदियों के जल में लेडए क्रोमियम निकिल जस्ता आदि धातुओं की मात्र बढ़ती जा रही है जो पर्यावरण को जनजीवन के प्रतिकूल बनाती जा रही है। 

ण्

                                                        एन-11/36-2 रानीपुर

                                                          महमूरगंज वाराणसी

                                                        मोबाइल-9415270330

 

Overall Rating (1)

5 out of 5 stars

People in this conversation

Load Previous Comments